Sahara India Refund : सहारा इंडिया का पैसा 19 जिलों में हुआ वापिस, देखिए पूरी जिलों का लिस्ट।

सच कहूँ तो जिस दिन की उम्मीद में लाखों लोग सालों से बैठे थे, वो दिन आख़िरकार आ ही गया है। अगर आपने भी कभी सहारा इंडिया में अपनी पसीने की कमाई जमा की थी और फिर रिफंड के नाम पर सिर्फ़ दफ़्तरों के चक्कर काटे हैं, तो यह ख़बर सचमुच आपके लिए एक सुबह-सुबह की ताज़ा हवा जैसी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब ज़मीन पर काम शुरू हो गया है और देश के 12 जिलों में सहारा का पैसा लौटना शुरू हो चुका है। यह सिर्फ़ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन लाखों आम लोगों के धैर्य और भरोसे का सम्मान है, जिन्होंने सिस्टम पर भरोसा रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई डेडलाइन दादा-दादी के चेहरे पर दिखी राहत

मेरे हिसाब से यह सबसे बड़ी राहत की बात है कि अब तक 35 लाख से ज़्यादा लोगों के खाते में 6,800 करोड़ रुपए से अधिक की रकम पहुँच चुकी है। यह पैसा सीधे आपके बैंक खाते में DBT के ज़रिए भेजा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है, यानी अब बाकी बचे लोगों को भी पूरा पैसा मिलने की उम्मीद पक्की हो गई है। कल्पना कीजिए, वो बुज़ुर्ग दादा-दादी या मध्यमवर्गीय परिवार, जिनकी बचत सालों से अटकी पड़ी थी, उनके चेहरे पर अब जो राहत होगी यह सिर्फ़ आंकड़ों की बात नहीं है।

क्या आपका नाम लिस्ट में है

अब सबसे ज़रूर सवाल क्या आपका नाम लिस्ट में है जी हाँ जिन 12 जिलों में यह प्रक्रिया शुरू हुई है, वहाँ पहले से दस्तावेज़ सत्यापित हो चुके थे। सरकार की कोशिश है कि जिनके आवेदन सबसे पहले और सही थे, उन्हें तुरंत पैसा मिल जाए ताकि बार-बार दफ़्तर न चक्कर लगाना पड़े। लेकिन अगर आपका आवेदन कभी रिजेक्ट हो गया था, तो घबराइए नहीं। आप फिर से CRCS-सहारा पोर्टल पर जाकर दोबारा आवेदन कर सकते हैं। बस ध्यान रखें, आधार से लिंक बैंक खाता एक्टिव होना चाहिए अपना स्टेटस चेक करना अब पहले से कहीं ज़्यादा आसान है। आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं। बस CRCS सहारा रिफंड पोर्टल पर जाएँ, अपना क्लेम नंबर और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर डालें, और घर बैठे पता कर लें कि आपका पैसा किस स्टेज पर है। यह सुविधा वाक़ई एक बड़ी छूट है।

सहारा रिफंड सिर्फ पैसे नहीं टूटे विश्वास को जोड़ने की ईंट है

मुझे लगता है कि यह पूरी कवायद सिर्फ़ पैसे लौटाने से कहीं बढ़कर है। यह उस टूटे हुए भरोसे को दोबारा जोड़ने की पहली ईंट है। जब आम आदमी का फंसा हुआ पैसा लौटता है, तो उसकी आँखों में सिस्टम के प्रति जो नया विश्वास पैदा होता है, वह किसी भी रकम से कहीं ज़्यादा कीमती होता है। आने वाले दिनों में और जिलों में यह प्रक्रिया तेज़ होगी, और उम्मीद की यह किरण और चौड़ी होती जाएगी। आख़िरकार, इंतज़ार का फल मीठा ही होता है।

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