अगर आप भी हर महीने रसोई के बजट को लेकर थोड़ा-बहुत टेंशन में रहते हैं तो यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है। क्योंकि घरेलू गैस सिलेंडर का दाम केवल एक नंबर नहीं बल्कि आपके महीने का पूरा हिसाब-किताब बदल देता है। लंबे समय से लोग एलपीजी सिलेंडर सस्ता होने का इंतज़ार कर रहे थे, और 1 फरवरी 2026 का अपडेट लेकर आया है। सवाल यह है कि क्या इस अपडेट में आम लोगों के लिए कोई राहत छुपी है, या फिर सब कुछ पहले जैसा ही है।
ताज़ा हालात घरेलू सिलेंडर पर रोक, कमर्शियल पर मार
सीधी बात यह है कि 1 फरवरी से आम घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मतलब, जिन लोगों को उम्मीद थी कि गैस सस्ती होगी, उन्हें अभी और इंतज़ार करना पड़ेगा। राजस्थान की राजधानी जयपुर में यह सिलेंडर अभी भी 856.50 रुपए में मिल रहा है, और दिल्ली में कीमत लगभग 853 रुपए के आसपास स्थिर है। यह एक तरह की राहत जरूर है क्योंकि बढ़ते दामों के इस दौर में कीमत का न बढ़ना भी एक छोटी जीत की तरह है लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी खबर भी है जो छोटे दुकानदारों और चाय-समोसे बेचने वालों की नींद उड़ा सकती है। 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 50 रुपए का इजाफा कर दिया गया है। अब दिल्ली में यह सिलेंडर 1,740 रुपए के पार पहुंच गया है। मेरी नज़र में, यह सीधे आपकी चाय के कप और रेस्टोरेंट के बिल पर दिखेगा, क्योंकि बढ़ी हुई लागत अक्सर हम जैसे ग्राहकों तक ही पहुंचाई जाती है।
उज्ज्वला योजना गरीब परिवारों के लिए मजबूत सहारा
इस पूरे मामले में एक सच्ची राहत की बात यह है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। राजस्थान जैसे राज्यों में बीपीएल कनेक्शन धारकों को रियायती दर पर ही गैस मिलती रहेगी। बढ़ती महंगाई के बीच यह सब्सिडी उन करोड़ों परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा है, जिनके लिए पूरा दाम चुकाना मुश्किल होता है। यह सरकार की एक समझदारी भरी चाल लगती है, जिससे आम आदमी को बचत होती है।
कुल मिलाकर व्यापारियों की चिंता घरवालों की राहत
मेरे ख्याल से यह अपडेट एक मिली-जुली भावना लेकर आया है। एक तरफ जहां छोटे होटल-ढाबे चलाने वाले व्यापारी इस बढ़ोतरी से चिंतित हैं वहीं दूसरी तरफ आम परिवारों को यह सोचकर राहत मिली है कि उनके रसोई के बजट पर फिलहाल कोई नया बोझ नहीं आया। यह सिर्फ दामों का उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले असर की एक साफ कहानी है अब सबकी नजर आने वाले महीनों पर है। वैश्विक हालात और सरकार के फैसले यह तय करेंगे कि यह कहानी आगे किस रूप में लिखी जाती है क्या आम आदमी को घरेलू गैस में सच्ची राहत मिल पाएगी या फिर यह स्थिरता भी एक दिन टूटेगी फिलहाल तो हालात यही कहते हैं कि घर की रसोई का बजट बचा रहेगा लेकिन बाहर चाय-नाश्ता थोड़ा और महंगा हो सकता है।