सीनियर सिटीजन की हुई मौज, अब 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को मिलेंगे बड़े फायदें। Senior Citizen News

अगर आपके घर में कोई 60 से 75 साल का सीनियर सिटीजन है, तो यह खबर सीधे आपके लिए है। दरअसल, सरकार ने हमारे बुजुर्ग माता-पिता और दादा-दादी के लिए एक बेहद सम्मानजनक और राहत भरा फैसला लिया है। बढ़ती महंगाई और मेडिकल खर्चों के बीच अक्सर हमारे बुजुर्ग चिंता में रहते हैं, लेकिन अब उनकी इस चिंता को कम करने के लिए कई बड़े फायदे घोषित किए गए हैं। यह सिर्फ योजनाओं का ऐलान नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति कृतज्ञता का एक सुंदर इजहार है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार और देश की सेवा में लगा दिया।

पापा की चिंता अब खत्म

सबसे बड़ी राहत स्वास्थ्य के मोर्चे पर दी गई है। मेरे अपने पिता जी अक्सर महंगे इलाज के खर्चे को लेकर परेशान रहते थे। लेकिन अब ऐसी चिंता की जरूरत नहीं क्योंकि 70 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को ‘आयुष्मान वय वंदना कार्ड’ के जरिए पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। यह सुविधा न सिर्फ सरकारी बल्कि सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पतालों में भी मान्य होगी। सच कहूं तो बढ़ते हेल्थ केयर बिल के इस दौर में यह कदम बुजुर्गों और उनके बच्चों दोनों के लिए मन का एक बोझ हल्का करने वाला है।

अब सीनियर सिटीजन सेविंग पर मिलेगा 8.2% ब्याज

वित्तीय मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। बुजुर्गों की बचत पर बेहतर रिटर्न देने के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम पर ब्याज दर बढ़ाकर 8.2 प्रतिशत सालाना कर दी गई है। मेरे हिसाब से यह एक समझदारी भरा कदम है, क्योंकि बैंकों की सामान्य एफडी पर मिलने वाले ब्याज के मुकाबले यह कहीं बेहतर रिटर्न देगी। साथ ही, अटल पेंशन योजना के तहत हर महीने एक हजार से पांच हजार रुपये तक की पेंशन की गारंटी बुजुर्गों को एक स्थिर आय का भरोसा दिलाती है, जो उनकी आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी है।

रेल यात्रा से लेकर अस्पताल तक अब बुजुर्गों को मिलेगी प्राथमिकता

रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के लिए भी कई सुविधाएं दी गई हैं। अब रेल यात्रा में 30 से 50 फीसदी तक की छूट मिलेगी जिससे बुजुर्ग अपने रिश्तेदारों से मिलने या तीर्थयात्रा पर आसानी से जा सकेंगे। सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों में प्राथमिकता से सेवा मिलने जैसे छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण इंतजाम भी उनकी जिंदगी की झंझट कम करेंगे। मुझे लगता है कि इन सबके पीछे सिर्फ पैसे का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें यह एहसास दिलाना है कि उनका सम्मान और सुख-चैन देश के लिए मायने रखता है। यह फैसला हमें यह याद दिलाता है कि हमारे बुजुर्ग बोझ नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी पूंजी और अनुभव का खजाना हैं।

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